भारत में ऑनलाइन गेमिंग की लत एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रही है, जो कई युवाओं के जीवन को प्रभावित कर रही है। हाल के वर्षों में, ऑनलाइन गेमिंग की लत से जुड़ी आत्महत्याओं की खबरें चिंताजनक हैं। लखनऊ में एक 18 वर्षीय युवक की आत्महत्या, जिसने अपने सुसाइड नोट में ऑनलाइन गेमिंग और जुए में हुए नुकसान का जिक्र किया था, इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। यह घटना भारत सरकार द्वारा मनी गेम पर प्रतिबंध लगाने और ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने वाले विधेयक पारित करने के कुछ समय बाद हुई। इससे पहले, महाराष्ट्र में एक 16 वर्षीय किशोर की आत्महत्या के मामले में भी ऑनलाइन गेमिंग की लत को एक प्रमुख कारण पाया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि गेमिंग की लत भावनात्मक विनियमन को बाधित करती है, जिससे आवेग और वास्तविकता से अलगाव पैदा होता है। जब गेमिंग एक पलायन का साधन बन जाता है, तो पहुंच सीमित होने पर यह अत्यधिक प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकता है। 2022 के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 3.5% किशोरों में इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर (IGD) के लक्षण पाए गए, जिसमें 8% लड़के और 3% लड़कियाँ शामिल थीं। 2024 के एक सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 66% शहरी माता-पिता मानते हैं कि उनके 9-17 वर्ष के बच्चे स्क्रीन या गेम के आदी हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए, भारत सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के लिए एक विधेयक पारित किया है, जो मनी गेम पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाता है और ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देता है। इस कानून का उद्देश्य जुए जैसे हानिकारक प्रभावों को कम करना और एक वैध गेमिंग पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करना है। इस नए कानून के तहत, मनी-स्टेक वाले ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, जिसके उल्लंघन पर जुर्माना और कारावास हो सकता है। वहीं, ई-स्पोर्ट्स और अन्य प्रतिस्पर्धी खेल, जिनमें पैसे का दांव नहीं होता, को एक नियामक ढांचे के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा।
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, सरकार और यूनिसेफ मिलकर काम कर रहे हैं। यूनिसेफ इंडिया के अनुसार, भारत में 15-24 वर्ष की आयु के 252 मिलियन युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताएं बहुआयामी हैं और उनके शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही महत्वपूर्ण हैं। सरकार और यूनिसेफ किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए पीयर-सपोर्ट को महत्वपूर्ण मानते हैं। इस दिशा में, भारत में कई हेल्पलाइन जैसे किरण (1800-599-0019) और टेली-मानस (14416) भी उपलब्ध हैं जो मुफ्त परामर्श प्रदान करती हैं। इन प्रयासों से युवाओं को एक सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।



