अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने गाजा में नरसंहार रोकने के लिए इज़राइल को अंतरिम उपाय अपनाने का निर्देश दिया

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अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने 26 जनवरी 2024 को हेग में गाजा में नरसंहार के आरोपों के संबंध में इज़राइल के खिलाफ अंतरिम उपायों का आदेश दिया। यह महत्वपूर्ण कार्रवाई दक्षिण अफ्रीका द्वारा दायर एक याचिका के परिणामस्वरूप हुई, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि इज़राइल 1948 के नरसंहार अभिसमय (Genocide Convention) का उल्लंघन कर रहा है। न्यायालय ने इस बात की पुष्टि की कि उसके पास इस मामले पर न्यायिक क्षेत्राधिकार है और उसने पाया कि नरसंहार के आरोप प्रथम दृष्टया विश्वसनीय प्रतीत होते हैं। यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन को बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

न्यायालय ने इज़राइल को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि वह नरसंहार के कृत्यों को रोकने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सभी आवश्यक कदम उठाए। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि उसकी सेना ऐसे किसी भी कार्य में शामिल न हो। इन अनिवार्य उपायों में गाजा में फिलिस्तीनियों की हत्या पर रोक लगाना, उन्हें गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुँचाने से बचना, और जानबूझकर ऐसी जीवन स्थितियाँ पैदा न करना शामिल है जिनका अंतिम उद्देश्य फिलिस्तीनी समूह का भौतिक विनाश करना हो।

इसके अतिरिक्त, इज़राइल को दो प्रमुख दायित्व सौंपे गए हैं: पहला, साक्ष्य नष्ट होने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाना; और दूसरा, गाजा में फिलिस्तीनियों की विकट जीवन स्थितियों को सुधारने हेतु तत्काल आवश्यक बुनियादी सेवाओं और मानवीय सहायता के प्रावधान को सुनिश्चित करना। इज़राइल को इन अंतरिम उपायों के संबंध में उठाए गए कदमों की रिपोर्ट एक महीने के भीतर न्यायालय को प्रस्तुत करनी होगी।

न्यायालय ने अपने आदेशों के कारणों को स्पष्ट करते हुए उच्च पदस्थ इज़राइली अधिकारियों के बयानों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। इनमें इज़राइली राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग का वह बयान शामिल था, जिसमें उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के लिए सभी फिलिस्तीनियों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया था। न्यायालय ने इन बयानों को फिलिस्तीनियों के दुख को कम करके आंकने के रूप में देखा, जो अंतरिम उपायों को लागू करने का एक आधार बना। इसके बावजूद, इज़राइल ने इन आरोपों और न्यायालय के क्षेत्राधिकार को दृढ़ता से खारिज कर दिया है। इज़राइली विदेश मंत्रालय ने इस मुकदमे को 'मूल रूप से त्रुटिपूर्ण' बताते हुए यह दावा किया कि ICJ का निर्णय 'हमास के झूठे चित्रण' के साथ मेल खाता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस ऐतिहासिक फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे कुछ अन्य देशों ने संघर्ष पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। यूरोपीय संघ (EU) ने न्यायालय के बाध्यकारी निर्णयों का पालन करने की मांग की है। ICJ का यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान और संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। गाजा में बुनियादी ढांचे के विनाश और जीवन-रक्षक वस्तुओं की सीमित आपूर्ति के कारण उत्पन्न मानवीय संकट, न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों के तत्काल अनुपालन की आवश्यकता को और भी अधिक उजागर करता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से यह अपेक्षा की जाती है कि वह इज़राइल पर अपने दायित्वों को पूरा करने और मानवीय स्थिति में सुधार लाने के लिए दबाव बनाना जारी रखेगा, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल हो सके।

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स्रोतों

  • Deutsche Welle

  • Нікк. Ізраїль заперечує звіт ООН про голод у Газі та звинувачує ХАМАС у маніпуляціях

  • УНІАН. Війна в Газі - Суд ООН заборонив Ізраїлю вчиняти геноцид

  • Голос Америки. Amnesty International стверджує, що Ізраїль вчиняє геноцид у Газі

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