दिवंगत लेखक टेरी प्रैचेट के साहित्यिक कार्यों पर किए गए एक नए शैक्षणिक अध्ययन में उनके लेखन की शैली में कुछ सूक्ष्म लेकिन मापने योग्य बदलावों की पहचान की गई है। यह शोध संकेत देता है कि उनके लेखन में आए ये बदलाव उनकी तंत्रिका संबंधी बीमारी के शुरुआती लक्षणों को दर्शाते हैं, जो उनके निदान से काफी पहले ही प्रकट होने लगे थे। लफबरो यूनिवर्सिटी और कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जनवरी 2026 में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए, जिसमें प्रैचेट की प्रसिद्ध 'डिस्कवर्ल्ड' श्रृंखला के 33 उपन्यासों का गहन विश्लेषण किया गया। इस शोध का मुख्य उद्देश्य लेखक के पूरे करियर के दौरान संज्ञानात्मक परिवर्तनों का उनके मेडिकल टाइमलाइन के साथ मिलान करना था। वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से लेक्सिकल विविधता, यानी लेखक द्वारा उपयोग किए गए संज्ञा और विशेषणों के दायरे को मापने पर ध्यान केंद्रित किया।
यह विस्तृत भाषाई विश्लेषण डिमेंशिया के शुरुआती चरणों, जैसे कि पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी (पीसीए), की पहचान करने के लिए एक प्रभावी और गैर-आक्रामक मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उल्लेखनीय है कि टेरी प्रैचेट को 2007 में पीसीए का पता चला था। लफबरो यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के सीनियर लेक्चरर और मुख्य शोधकर्ता डॉ. थॉम विलकॉकसन ने बताया कि उनके उपन्यास 'द लास्ट कॉन्टिनेंट' में भाषाई जटिलता में एक महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई थी। यह पुस्तक 2007 के औपचारिक निदान से लगभग एक दशक पहले प्रकाशित हुई थी। यह अवलोकन इस बात की पुष्टि करता है कि मस्तिष्क में होने वाले मापने योग्य परिवर्तन नैदानिक लक्षणों के स्पष्ट होने से कई साल पहले ही व्यवहार में दिखाई देने लगते हैं।
शोध दल अब भविष्य के नैदानिक प्रोटोकॉल में दीर्घकालिक भाषाई मूल्यांकन को शामिल करने की पुरजोर वकालत कर रहा है। उनका मानना है कि इससे मस्तिष्क को होने वाली किसी भी अपरिवर्तनीय क्षति से पहले समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और उपचार संभव हो सकेगा। कार्डिफ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंग्लिश, कम्युनिकेशन एंड फिलॉसफी की लेक्चरर और सह-लेखिका डॉ. मेलोडी पैटिसन ने इन निष्कर्षों की सांख्यिकीय मजबूती की पुष्टि की है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उपन्यासों की लंबाई में भिन्नता के लिए सांख्यिकीय समायोजन करने के बाद भी भाषाई विविधता में गिरावट स्पष्ट रूप से बनी रही। इससे यह सिद्ध होता है कि शब्दों का यह संकुचन लेखक की अपनी पसंद के बजाय एक अंतर्निहित बीमारी का परिणाम था।
इस अध्ययन की कार्यप्रणाली साहित्यिक उत्पादन के माध्यम से संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आकलन करती है, जो पीसीए की धीमी प्रगति पर एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करती है। पीसीए वास्तव में अल्जाइमर रोग का एक दुर्लभ रूप है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क के दृश्य प्रसंस्करण केंद्रों को प्रभावित करता है। टेरी प्रैचेट, जिनका 2015 में 66 वर्ष की आयु में निधन हो गया था, अपने निदान के बाद डिमेंशिया के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक सक्रिय अभियानकर्ता बन गए थे। उनके जीवन का यह संदर्भ इस वैज्ञानिक शोध को और भी मार्मिक और महत्वपूर्ण बनाता है। 'ब्रेन साइंसेज' नामक पत्रिका में प्रकाशित यह शोध संज्ञानात्मक इतिहास के एक महत्वपूर्ण भंडार के रूप में दीर्घकालिक रचनात्मक कार्यों के विश्लेषण के महत्व को रेखांकित करता है।
इस शोध के सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, विशेष रूप से यह देखते हुए कि 2026 तक यूनाइटेड किंगडम में लगभग 982,000 लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं। बीमारी के पूर्व-नैदानिक चरण का पता लगाने की क्षमता, जो संभावित रूप से दस साल पहले ही संभव हो सकती है, उपचार की पूरी रणनीति को बदल सकती है। यह क्षमता चिकित्सा जगत को उन्नत लक्षणों के प्रबंधन के बजाय न्यूरोपैथोलॉजी के शुरुआती चरणों के दौरान ही निवारक उपचार शुरू करने में सक्षम बनाएगी, जिससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ जाएगी।


