प्राचीन एंटीकाइथेरा तंत्र: चंद्र पंचांग पर केंद्रित होने का नया खुलासा

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में घरेलू सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक व्यापक प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी है। 2023 के अंत में औपचारिक रूप दिए गए इस निर्णय ने एक मजबूत स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिए सरकार की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है। नीतिगत ढांचे के तहत वैश्विक फैब्रिकेशन इकाइयों (फैब्स) और डिज़ाइन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एक निर्दिष्ट समय सीमा में लगभग ₹76,000 करोड़ (लगभग $9.2 बिलियन) आवंटित किए गए हैं।

प्राचीन एंटीकाइथेरा तंत्र: चंद्र पंचांग पर केंद्रित होने का नया खुलासा-1

इस पहल का मुख्य तंत्र परियोजना लागत के 30% से 50% तक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जो तकनीकी जटिलता और निवेश के पैमाने पर निर्भर करता है। विशेष रूप से, सिलिकॉन फैब्रिकेशन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए सरकार 50% तक वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह रणनीतिक वित्तीय समर्थन आवेदकों द्वारा कठोर तकनीकी और परिचालन मानदंडों को पूरा करने पर निर्भर करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल उच्च-गुणवत्ता वाली, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी परियोजनाओं को ही राज्य का समर्थन प्राप्त हो।

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस पहल से उच्च-तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र के भीतर प्रत्यक्ष रूप से और सहायक उद्योगों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त, आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करना राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर 2020 के बाद से देखी गई लगातार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को देखते हुए। विश्लेषकों का सुझाव है कि सफल कार्यान्वयन भारत को दशक के अंत तक वैश्विक प्रौद्योगिकी हार्डवेयर पारिस्थितिकी तंत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है।

भू-राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, यह नीति केंद्रित क्षेत्रों से चिप उत्पादन को विविधीकृत करने के व्यापक वैश्विक प्रयासों के साथ संरेखित होती है। प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन की पेशकश करके, भारत का लक्ष्य अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया सहित प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर खिलाड़ियों से निवेश आकर्षित करना है। यह कदम आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के प्रति एक रणनीतिक जवाबी कार्रवाई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जाता है।

महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और पर्याप्त वित्तीय परिव्यय के बावजूद, कार्यान्वयन को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख बाधाओं में अल्ट्रा-शुद्ध जल और निर्बाध बिजली आपूर्ति तक निरंतर पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है, जो उन्नत फैब्रिकेशन प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक आवश्यकताएं हैं। इसके अतिरिक्त, जटिल चिप विनिर्माण कार्यों का प्रबंधन करने में सक्षम एक विशेष प्रतिभा पूल विकसित करना एक दीर्घकालिक आवश्यकता बनी हुई है, जिसके लिए केंद्रित शैक्षिक और प्रशिक्षण निवेश की आवश्यकता है। योजना की सफलता नियामक मंजूरी की दक्षता और उस गति पर निर्भर करती है जिस पर बुनियादी ढांचे के अंतराल को संबोधित किया जाता है।

सरकार ने योजना को निष्पादित करने, प्रगति की निगरानी करने और आवश्यक स्वीकृतियों को सुविधाजनक बनाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने हेतु एक समर्पित इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की स्थापना की है। उद्योग हितधारकों की प्रारंभिक प्रतिक्रिया सतर्क रूप से आशावादी रही है, कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संघों ने प्रारंभिक रुचि व्यक्त की है। आने वाले 18 से 24 महीने नीतिगत ढांचे की प्रभावकारिता और वित्तीय प्रोत्साहनों को मूर्त विनिर्माण क्षमता में बदलने की उसकी क्षमता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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स्रोतों

  • Dnevno.hr

  • Ars Technica

  • Phys.org

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