मानव डीएनए में प्राचीन वायरल प्रोटीन की संरचना का खुलासा: नई चिकित्सीय संभावनाएँ

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वैज्ञानिकों ने मानव डीएनए में छिपे प्राचीन वायरल प्रोटीन, HERV-K एनवेलप प्रोटीन की त्रि-आयामी संरचना को सफलतापूर्वक समझ लिया है। यह अभूतपूर्व खोज, जो ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के निदान और उपचार के लिए नए रास्ते खोलती है। लगभग 8% मानव जीनोम प्राचीन वायरस से प्राप्त आनुवंशिक सामग्री से बना है, जिन्हें मानव एंडोजीनस रेट्रोवायरस (HERVs) कहा जाता है। ये वायरस लाखों साल पहले हमारे पूर्वजों के जीनोम में एकीकृत हो गए थे और आमतौर पर निष्क्रिय रहते हैं, जिन्हें जीनोम का "डार्क मैटर" माना जाता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे कि कैंसर या ऑटोइम्यून विकारों में, ये HERV-K प्रोटीन फिर से सक्रिय हो जाते हैं और कोशिकाओं की सतह पर दिखाई देने लगते हैं।

ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी की टीम, जिसका नेतृत्व एरिका ओलमन सैफिर ने किया, ने क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके HERV-K एनवेलप प्रोटीन की संरचना का विस्तृत अध्ययन किया। इस प्रोटीन की अस्थिर प्रकृति के कारण इसका अध्ययन करना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि यह आसानी से अपना आकार बदल लेता है। शोधकर्ताओं ने प्रोटीन में सूक्ष्म संरचनात्मक संशोधन करके और विशेष एंटीबॉडी का उपयोग करके इसे स्थिर किया, जिससे इसकी त्रि-आयामी संरचना को सटीक रूप से चित्रित किया जा सका।

इस शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि HERV-K एनवेलप प्रोटीन की संरचना एचआईवी और एसआईवी जैसे अन्य रेट्रोवायरस के प्रोटीन से काफी भिन्न है। यह एक लंबा और पतला ट्राइमर बनाता है, जो इसे अद्वितीय बनाता है। यह विशिष्ट संरचना इसे कैंसर कोशिकाओं और ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की कोशिकाओं पर एक संभावित बायोमार्कर और चिकित्सीय लक्ष्य बनाती है। शोधकर्ताओं ने ऐसे एंटीबॉडी भी विकसित किए हैं जो इन HERV-K प्रोटीन को विशिष्ट रूप से पहचान सकते हैं।

इन एंटीबॉडी का उपयोग न केवल बीमारियों के निदान में किया जा सकता है, बल्कि कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने वाली इम्यूनोथेरेपी के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उदाहरण के लिए, ये एंटीबॉडी स्वस्थ कोशिकाओं की तुलना में कैंसर कोशिकाओं पर HERV-K प्रोटीन का पता लगा सकते हैं, जिससे कैंसर के उपचार में सटीकता बढ़ सकती है। इसी तरह, रूमेटाइड आर्थराइटिस और ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के रोगियों में इन प्रोटीन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए भी इन एंटीबॉडी का उपयोग किया जा सकता है। यह खोज मानव जीनोम के भीतर छिपे प्राचीन वायरल तत्वों की जटिलता और हमारे स्वास्थ्य पर उनके संभावित प्रभाव को उजागर करती है। HERV-K प्रोटीन की संरचना को समझने से कैंसर, ऑटोइम्यून विकारों और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के लिए नई निदान विधियों और लक्षित उपचारों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह शोध इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे हमारे आनुवंशिक अतीत के अवशेष वर्तमान चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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स्रोतों

  • Tom's Hardware

  • Hidden viruses in our DNA could be medicine’s next big breakthrough

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