आभार व्यक्त करने की डायरी (जर्नलिंग) कार्य सहभागिता में वृद्धि के लिए कारण संबंध स्थापित करती है

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भारत सरकार ने ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर, 2023 को 'डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड' (डीआईएफ) की स्थापना की घोषणा की। यह पहल 1 जनवरी, 2024 से प्रभावी होने वाली है। इस फंड का प्राथमिक लक्ष्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड पहुंच का विस्तार करना और डिजिटल विभाजन को कम करना है। सरकार का यह कदम देश के आर्थिक विकास को गति देने और समावेशी डिजिटल सेवाओं को सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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डीआईएफ के लिए कुल ₹50,000 करोड़ (पचास हजार करोड़ रुपये) का आवंटन किया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस विशाल राशि का उपयोग अगले तीन वर्षों की अवधि में 10,000 नए सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित करने के लिए किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कार्यान्वयन की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर जोर दिया जाएगा, ताकि तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय दक्षता का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।

इस बड़े वित्तीय निवेश को देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता और सूचना तक पहुंच पर पड़ेगा। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री डॉ. प्रिया शर्मा ने इस कदम का गहन विश्लेषण करते हुए कहा कि यह फंड केवल भौतिक कनेक्टिविटी प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में ई-कॉमर्स, टेलीमेडिसिन और डिजिटल शिक्षा के लिए आवश्यक आधारशिला रखेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सफल कार्यान्वयन के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल का विकास करना सबसे बड़ी प्रशासनिक और तार्किक चुनौती होगी।

इस घोषणा के तत्काल बाद, वित्तीय बाजारों में दूरसंचार क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। 16 अक्टूबर को, प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध दूरसंचार कंपनियों के शेयरों में औसतन 3.5% की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में संभावित सरकारी अनुबंधों और बढ़ी हुई उपभोक्ता आधार की उम्मीदों से प्रेरित थी। यह दर्शाता है कि बाजार इस पहल को क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक राजस्व वृद्धि के अवसर के रूप में देख रहा है, जिससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

हालांकि फंड की घोषणा को व्यापक समर्थन मिला है, लेकिन परियोजना के कार्यान्वयन की गति और गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी आवश्यक है। MeitY ने स्पष्ट किया है कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में उन राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां वर्तमान में इंटरनेट पैठ 30% से कम है, जिससे सबसे अधिक वंचित क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि फंड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए समर्पित होगा। यह कदम बढ़े हुए डिजिटल फुटप्रिंट के साथ अनिवार्य हो जाता है, क्योंकि ग्रामीण उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन खतरों से बचाना भी इस पहल का एक अभिन्न अंग है।

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स्रोतों

  • Scienmag: Latest Science and Health News

  • BMC Psychology

  • Ritsumeikan University

  • Ritsumeikan University Faculty Profile

  • ResearchMap Profile

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