मालागा प्रांत में दिसंबर 2025 की भारी वर्षा: बाढ़, जनहानि और जल प्रबंधन पर पुनर्विचार

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दिसंबर 27-28, 2025 के सप्ताहांत में, मालागा प्रांत में अभूतपूर्व वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण एक दुर्लभ 'रेड अलर्ट' जारी किया गया और व्यापक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। इस तीव्र मौसमी घटना ने क्षेत्र की मौजूदा जल निकासी प्रणालियों और सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। उदाहरण के लिए, कार्टामा के फाहला में 118 लीटर प्रति वर्ग मीटर से अधिक और अल्हाउरिन एल ग्रांडे में 131 लीटर प्रति वर्ग मीटर की रिकॉर्ड वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य स्तरों से काफी अधिक थी।

इस अत्यधिक वर्षा का सीधा परिणाम ग्वाडलहोरस नदी में उफान के रूप में सामने आया, जो रविवार की मध्यरात्रि के आसपास अपने किनारों से बाहर निकल गई। नदी का जलस्तर ऐतिहासिक 5.7 मीटर तक पहुँच गया, और प्रवाह दर 1,000 घन मीटर प्रति सेकंड से अधिक दर्ज की गई। इस भयावह स्थिति के मद्देनजर, इन्फोका और प्रांतीय अग्निशमन ब्रिगेड (CPB) के कर्मियों ने कार्टामा एस्टासियोन के निचले हिस्से सहित प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी और मलबा हटाने का कार्य तत्काल शुरू किया।

इस आपदा का मानवीय पहलू गंभीर रहा: एक व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि हुई और मालागा क्षेत्र में दो अन्य लोगों के लापता होने की सूचना मिली, जिसके कारण बचाव अभियान जारी रहे। सात परिवारों को उनके घरों से सुरक्षित निकाला गया। निवासियों ने संपत्ति के भारी नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया और कुछ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, विशेष रूप से एक रेलवे सीमा दीवार, ने एक 'जल-जाल' का निर्माण किया, जिसने बाढ़ के पानी को तेजी से कम होने से रोका।

यह घटना स्पेन में बार-बार आने वाली गंभीर मौसम चुनौतियों को रेखांकित करती है, जिससे बुनियादी ढांचे की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बढ़ी है। स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जल प्रबंधन में सुधार के लिए चर्चाएं चल रही हैं, जिसमें नदी के ऊपरी हिस्से में एक जलाशय के निर्माण की संभावित योजना शामिल है। निवासी पिछली क्षति के लिए अपर्याप्त तैयारी और मुआवजे को लेकर अपनी निराशा व्यक्त कर रहे हैं, जो आपदा प्रबंधन प्रणालियों में सुधार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

मालागा की घटना, भारत में जुलाई 2025 के दौरान महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, असम और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में देखी गई भारी वर्षा और बाढ़ की घटनाओं के संदर्भ में, वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच एक स्थानीय चेतावनी के रूप में कार्य करती है। यह संकट आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता का परीक्षण करता है, जबकि रेलवे सीमा दीवार जैसी संरचनाओं की भूमिका पर सवाल उठाता है, जो नियंत्रण के बजाय जल निकासी में बाधा बन गईं। यह स्थिति भविष्य में ऐसी चरम मौसमी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए लचीले और अनुकूलनीय शहरी नियोजन की अनिवार्यता को स्थापित करती है।

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स्रोतों

  • surinenglish.com

  • Ground News

  • Euro Weekly News

  • Cadena SER

  • Populares Málaga

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