ट्रेंटिनो के डायोसेसन संग्रहालय (Museo Diocesano Tridentino) में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत, 15वीं शताब्दी के अंत और 16वीं शताब्दी की शुरुआत की लकड़ी की मैडोना प्रतिमा के सफल जीर्णोद्धार कार्य को आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत किया गया। यह कलाकृति, जिसकी शैली एंटोनियो जियोल्फिनो (Antonio Giolfino) की कार्यशाला से समानताएं दर्शाती है, एक लंबी और जटिल बहाली प्रक्रिया से गुज़री है। प्रस्तुति समारोह 26 नवंबर, 2025 को संग्रहालय परिसर में आयोजित किया गया, जहाँ कला संरक्षण की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बहाली के चरणों को जनता के अवलोकन हेतु 'इन-व्यू' तरीके से प्रदर्शित किया गया।
इस बहुमूल्य धार्मिक कलाकृति का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जिसमें 1975 में इसकी चोरी की घटना शामिल है, जिसके बाद इसे एडिज नदी (Adige river) के पास गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त अवस्था में बरामद किया गया था। क्षति में संरचनात्मक गिरावट और वायुमंडलीय प्रभावों तथा चोरी के बाद के अनुचित संरक्षण प्रयासों के कारण मूल बहुरंगी चित्रण (polychromy) का महत्वपूर्ण नुकसान शामिल था। जीर्णोद्धार का कार्य 'स्टेफानो जेंटिली - कन्सेर्वाज़िओन ए रेस्टॉरो डि बेनी कल्चरली' (Stefano Gentili - Conservazione e restauro di beni culturali) नामक विशेषज्ञ प्रयोगशाला द्वारा किया गया, जो सांस्कृतिक संपत्ति के संरक्षण में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है।
इस संरक्षण प्रयास में कई प्रमुख संस्थाओं और व्यक्तियों का सहयोग शामिल था, जो स्थानीय विरासत की सुरक्षा के लिए एक सफल सहयोगी मॉडल को उजागर करता है। इसमें दान देने वाले मोयोला परिवार (Moiola family), वित्तीय प्रायोजक लायंस क्लब ट्रेंटो होस्ट (Lions Club Trento Host), और संग्रहालय के अधिकारी शामिल थे। संग्रहालय के निदेशक डोमिज़ियो कैटोई (Domizio Cattoi) और अध्यक्ष मिशेल एंड्रियास (Michele Andreaus) ने इस हस्तक्षेप को समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की स्मृति को संरक्षित करने का एक मौलिक कार्य बताया है। यह कलाकृति मूल रूप से बेसाग्नो (Besagno) के चर्च से उत्पन्न हुई मानी जाती है, और बाद में इसे उसी शहर में मोयोला परिवार के एक धार्मिक तीर्थस्थल में स्थापित किया गया था।
'इन-व्यू' बहाली का निर्णय, जो संरक्षण कार्य में पारदर्शिता और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक उल्लेखनीय प्रक्रियात्मक विकल्प है, स्थानीय पवित्र कला विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए चल रहे प्रयासों को रेखांकित करता है। एंटोनियो जियोल्फिनो, जिनके काम से यह प्रतिमा जुड़ी हुई है, वेरोना स्कूल के चित्रकार थे, जिनके शिष्यों में जियोवन फ्रांसेस्को कैरोटो (Giovan Francesco Caroto) जैसे कलाकार शामिल थे। यह घटना दर्शाती है कि कैसे विभिन्न हितधारकों—परिवार, दानदाता संगठन, और विशेषज्ञ संरक्षण प्रयोगशाला—के समन्वय से ऐतिहासिक कलाकृतियों को दशकों के नुकसान के बाद सफलतापूर्वक बचाया जा सकता है, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहती है।


