पाकिस्तान में मानसिक स्वास्थ्य संकट: कलंक तोड़ने का सामूहिक प्रयास जारी

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पाकिस्तान एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है, जो देश की प्रगति में एक अनदेखी बाधा बना हुआ है। अनुमान है कि देश की लगभग एक-चौथाई आबादी, यानी करीब 50 मिलियन लोग, किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। इस व्यापक आवश्यकता के बावजूद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट का 0.5% से भी कम हिस्सा इन आवश्यक सेवाओं के लिए आवंटित किया जाता है, जो इस गंभीर असंतुलन को उजागर करता है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट ने 'मिलकर-आओ बात करें' नामक एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मानसिक कल्याण के विषय पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना और इससे जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करना है। यह अभियान एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों—पेशेवरों, शिक्षकों, सरकारी अधिकारियों, माता-पिता, हस्तियों और सामुदायिक नेताओं—को एक साथ आने का आह्वान किया गया है ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके और शुरुआती हस्तक्षेप पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

इस सामूहिक प्रयास की पहुँच उल्लेखनीय रही है। अभियान ने अपने व्यापक प्रचार के माध्यम से 16.8 मिलियन से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचाई है। इसके अतिरिक्त, इसने समूहों और पेशेवर सहायता के माध्यम से लगभग 96,000 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान की है। यह दर्शाता है कि जब समुदाय एकजुट होकर किसी चुनौती का सामना करता है, तो समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, केयरटेक फाउंडेशन और कोसारफ फाउंडेशन के साथ एक नई साझेदारी की गई है। इस सहयोग का लक्ष्य सहायता तक पहुँच का विस्तार करना और मानसिक स्वास्थ्य कलंक को और कम करना है। यह संयुक्त प्रयास पाकिस्तान भर में लाखों लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण और विनियमित देखभाल सुनिश्चित करने वाले एक सुदृढ़ मानसिक स्वास्थ्य तंत्र के निर्माण पर केंद्रित है।

शोध बताते हैं कि पाकिस्तान में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की भारी कमी है। देश में केवल लगभग 450 मनोचिकित्सक हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए लगभग 9,000 की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति और भी विकट है, जहाँ प्रति दस लाख लोगों पर केवल एक मनोचिकित्सक उपलब्ध है। यह कमी दर्शाती है कि केवल पेशेवरों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है; समाज के हर व्यक्ति को इस विषय पर जिम्मेदारी लेनी होगी और एक-दूसरे के प्रति करुणा का भाव रखना होगा।

मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा करना व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक प्रगति में रुकावट है। यह अभियान इसी चेतना को जगाने का एक प्रयास है, ताकि हर व्यक्ति अपने मानसिक कल्याण को प्राथमिकता दे सके और एक अधिक सामंजस्यपूर्ण एवं सशक्त समाज का निर्माण हो सके।

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स्रोतों

  • GEO TV

  • British Asian Trust: Milkar: let’s change the future of mental health

  • CareTech Foundation: British Asian Trust

  • Alliance Magazine: Funders support Pakistani partners to deliver mental health support

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