वैश्विक जल और स्वच्छता संकट: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर
द्वारा संपादित: Dmitry Drozd
संयुक्त राष्ट्र की 26 अगस्त, 2025 को जारी एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग, जो वैश्विक आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं, अभी भी सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। इनमें से 106 मिलियन लोग नदियों और झीलों जैसे सतही जल स्रोतों पर निर्भर हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। यह स्थिति 2030 तक सार्वभौमिक पहुंच के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में धीमी प्रगति को दर्शाती है, जिससे यह लक्ष्य और भी कठिन होता जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ द्वारा जारी "घरेलू पेयजल और स्वच्छता पर प्रगति 2000-2024: असमानताओं पर विशेष ध्यान" नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां पिछले दशक में कुछ प्रगति हुई है, वहीं महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं। निम्न-आय वाले देशों, संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों, ग्रामीण समुदायों, बच्चों और अल्पसंख्यक जातीय समूहों को सबसे अधिक असमानताओं का सामना करना पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन में पर्यावरण विभाग के प्रमुख रॉजर किर्श ने इस बात पर जोर दिया कि "जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएँ विलासिता नहीं हैं: ये मौलिक मानवाधिकार हैं। हमें इस प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता है, विशेष रूप से सबसे कमजोर आबादी के लिए जिन्हें अक्सर उपेक्षित किया जाता है।"
सुरक्षित जल और स्वच्छता की कमी का सीधा असर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। रिपोर्टों से पता चलता है कि हर साल लाखों लोग, विशेषकर पांच साल से कम उम्र के बच्चे, जल-जनित बीमारियों से मर जाते हैं। डायरिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियाँ दूषित पानी और खराब स्वच्छता प्रथाओं के कारण फैलती हैं। यूनिसेफ में जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य की निदेशक सेसिलिया शार्प ने चेतावनी दी है कि "जब बच्चों को सुरक्षित जल और स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच मिलती है, तो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की संभावनाएं उनके कल्याण के लिए प्राथमिकता बन जाती हैं। ये असमानताएं विशेष रूप से लड़कियों के मामले में स्पष्ट हैं, जो अक्सर पानी लाने का बोझ उठाती हैं और बाहर जाने पर अतिरिक्त जोखिमों का सामना करती हैं।"
वर्तमान गति से, हर बच्चे के लिए सुरक्षित जल और स्वच्छता प्रदान करना एक दूर का सपना बनता जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि 2015 से, 961 मिलियन लोगों ने सुरक्षित पेयजल सेवाओं तक पहुंच प्राप्त की है, जिससे कवरेज 68% से बढ़कर 74% हो गया है। हालांकि, 2.1 मिलियन लोग अभी भी इन सेवाओं से वंचित हैं। इसी तरह, 2015 के बाद से, 1.2 मिलियन लोगों ने सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच प्राप्त की है, जिससे कवरेज 48% से बढ़कर 58% हो गया है। इसके बावजूद, 3.4 बिलियन लोग अभी भी सुरक्षित स्वच्छता से वंचित हैं, और 354 मिलियन लोग खुले में शौच करते हैं।
यह स्थिति 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की राह में बड़ी बाधाएं खड़ी करती है। वर्तमान प्रगति दर को देखते हुए, विशेषज्ञों का अनुमान है कि सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करने में सदियाँ लग सकती हैं, जब तक कि प्रयासों में तेजी न लाई जाए। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय 2026 में संयुक्त राष्ट्र विश्व जल मंच जैसे महत्वपूर्ण सम्मेलनों के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास कर रहा है। इन मंचों का उद्देश्य राजनीतिक इच्छाशक्ति, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देना है ताकि SDG 6 को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति को तेज किया जा सके। यह वैश्विक जल संकट एक गंभीर चुनौती है, लेकिन यह सामूहिक कार्रवाई और नवाचार के माध्यम से एक बेहतर भविष्य बनाने का अवसर भी प्रस्तुत करता है, जहां हर किसी को स्वच्छ जल और गरिमापूर्ण स्वच्छता मिले।
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स्रोतों
Deutsche Welle
اليوم السابع
دار الهلال
الشرق الأوسط
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